वैदिक मंत्रोच्चार संग हुआ भगवान परशुराम जन्मोत्सव का आगाज।

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बलिया /महर्षि भृगु मुनि की धरती एक बार फिर आस्था, उत्साह और भव्यता से सराबोर हो उठी, जब भगवान परशुराम की जयंती पूरे उनके ही प्रांगण में धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस बार का आयोजन इतना भव्य रहा कि लोगों के दिलों में इसकी याद लंबे समय तक ताजा रहने वाली है। कार्यक्रम का शानदार आयोजन विधि-विधान से पूजा और आरती के साथ हुआ। जैसे ही वैदिक मंत्रोच्चार गूंजा, पूरा माहौल भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए। मशहूर गायिका निशा उपाध्याय और लोकप्रिय गायक राकेश मिश्रा ने अपने भजनों से ऐसा समा बांधा कि पूरा पंडाल झूम उठा। भक्तों ने तालियों और जयकारों के साथ इस आध्यात्मिक आयोजन को और भी खास बना दिया।

इस दौरान कार्यक्रम के संयोजक मृत्युंजय तिवारी बब्लू ने परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से बलिया में भगवान परशुराम के भव्य मंदिर निर्माण की मांग भी रखी, जिसे लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। कुल मिलाकर, यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम बनकर उभरा, जिसने बलिया को एक बार फिर गौरव का एहसास कराया। शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. लक्ष्मी कांत वाजपेई, गोरखपुर के सांसद रविकिशन शुक्ल, अवध बिहारी चौबे, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, राज्यसभा सांसद नीरज शेखर, पूर्व प्रमुख मृत्युंजय तिवारी बबलू, राजीव उपाध्याय आदि ने भगवान परशुराम के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान सभी को भगवान परशुराम के मुख्य शस्त्र फरसा दिया गया जिसे प्रतीक स्वरूप सभी ने उठाकर नमन किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डा.लक्ष्मीकांत वाजपेई ने कहा कि परशुराम जयंती केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि सत्य, साहस और धर्म की स्थापना के संदेश को स्मरण करने का अवसर भी है। कहा भगवान परशुराम भारत के भाग्य निर्माता हैं। उनका त्वरित निर्णय और सटीक रणनीति आज के भारत के लिए मार्गदर्शक हैं। उनके आदर्शों पर चलकर भारत विश्व शक्ति बन सकता है। मुख्य वक्ता गोरखपुर के सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि भगवान परशुराम का जीवन शस्त्र और शास्त्र, ज्ञान और कर्म के अद्भुत संतुलन का प्रतीक है। उन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, जो कि पृथ्वी पर अन्याय और अधर्म का नाश करने के लिए त्रेतायुग में अवतरित हुए थे।

ज्ञान, तप और शक्ति के प्रतीक माने जाने वाले भगवान परशुराम अष्टचिरंजीवी में से एक हैं और हर युग में पृथ्वी पर मौजूद रहते हैं। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि भगवान परशुराम धर्म व नीति के प्रतिमूर्ति थे जो शास्त्र व शस्त्र दोनों में निपुण थे। उन्होंने धर्म की स्थापना के लिए कई बार अत्याचारियों का संहार किया। कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा, पीसीएफ के चेयरमैन वाल्मीकि त्रिपाठी, पूर्व विधायक भगवान पाठक, पूर्व विधायक नारद राय, अशोक उपाध्याय, पूर्व विधायक धनंजय कन्नौजिया, विनोद दुबे, पूर्व मंत्री छट्ठू राम, अशोक पाठक, शशांक शेखर त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

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