प्रशासन व उत्तर प्रदेश शासन से अपनी समस्याओं के समाधान की लगाई गुहार।
बलिया /राजीव गांधी यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु से बीपीटी व एमपीटी की पढ़ाई कर चुके फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. मयंक भारद्वाज इन दिनों काफी परेशान नजर आ रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन व उत्तर प्रदेश शासन से अपनी समस्याओं के समाधान की गुहार लगाई है।
डॉ. भारद्वाज ने बताया कि नगर के जगदीशपुर चौराहे के पास उन्हें लीज पर जमीन मिली थी, जहां उनका क्लीनिक संचालित होता था और वे नियमित रूप से हाउस टैक्स व अन्य शुल्क भी जमा करते थे। उनका आरोप है कि नगर पालिका की लगभग 10 कट्ठा से अधिक जमीन पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जा कर उसे बेचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि इसकी निष्पक्ष जांच हो जाए तो प्रशासन को शहर के बीचों-बीच बहुमूल्य जमीन मिल सकती है, जिसका उपयोग सरकारी कार्यों के लिए किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि मौके पर उनकी जमीन 10 कट्ठा है, लेकिन दबंगों द्वारा करीब 21 कट्ठा तक कब्जा कर लिया गया है। इस संबंध में उनके पास पुराने अभिलेख व साक्ष्य भी मौजूद हैं। उन्होंने प्रशासन से मामले की जांच कर अवैध कब्जाधारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
इसके अलावा डॉ. भारद्वाज ने फिजियोथेरेपिस्ट भर्ती में चयन के बावजूद नियुक्ति न मिलने का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि उन्होंने सभी दस्तावेज जमा कर परीक्षा पास की और मेरिट लिस्ट में नाम आने के बाद भी उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में नियमों में बदलाव कर उन्हें बाहर कर दिया गया।
डॉ. भारद्वाज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वे बेरोजगारी की स्थिति में हैं, जिससे परिवार के भरण-पोषण व बच्चों की पढ़ाई में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि डॉ. भारद्वाज ने हाल ही में घुटने के दर्द के सस्ते इलाज को लेकर भी दावा किया है, जिसमें 10 से 15 हजार रुपये में मरीजों को राहत मिलने की बात कही गई है। उन्होंने प्रशासन से अपने शोध और समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देने की मांग की है।