15 साल 7 माह 6 दिन बाद आया फैसला, दो अभियुक्त साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त।
त्रिभुवन नाथ यादव एडवोकेट
विधि संवाददाता, बलिया।
बलिया /करीब 15 वर्ष पुराने हत्या और शव छिपाने के मामले में विशेष न्यायाधीश (ई.सी. एक्ट) रामकृपाल की अदालत ने दो सगे भाइयों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अभियुक्त राजेन्द्र सोनार पुत्र रामवचन सोनार तथा अमित उर्फ मंटू पुत्र राजेन्द्र सोनार, निवासी जापलिनगंज नया चौक, थाना कोतवाली, बलिया को 10-10 हजार रुपये के जुर्माने से भी दंडित किया है।
जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर दोनों अभियुक्तों को अतिरिक्त दो-दो माह का कारावास भुगतना होगा। वहीं, इसी मामले में पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में दो अन्य आरोपियों को न्यायालय ने दोषमुक्त करने का आदेश दिया।
उधार का पैसा मांगने पर हत्या का आरोप!
अभियोजन के अनुसार, बांसडीहरोड थाना क्षेत्र के टकरसन गांव निवासी रामप्रवेश यादव ने मनीयर थाने में तहरीर देकर बताया था कि 13 जनवरी 2011 को उनके पिता विजय यादव दोपहर करीब 12 बजे बलिया शहर आए थे। उन्होंने बताया था कि पंकज सिंह अधिवक्ता को दही देने के बाद राजेन्द्र सोनार के यहां उधार दिए रुपये मांगने जाएंगे और वहा से सामान खरीदकर वापस लौटेंगे।

विजय यादव द्वारा राजेन्द्र सोनार को पूर्व में रुपये उधार दिए गए थे। रुपये वापस मांगने पर वह कथित रूप से टालमटोल करता था। शाम तक जब विजय यादव घर नहीं लौटे तो परिजन उनकी तलाश में बलिया शहर पहुंचे।
तलाश के दौरान पंकज सिंह अधिवक्ता ने बताया कि विजय यादव दही देने के बाद दोपहर में ही वहां से चले गए थे। इसके बाद परिजन राजेन्द्र सोनार के घर पहुंचे, जहां बातचीत संदिग्ध लगने पर उन्हें शक हुआ। मोबाइल पर राजेन्द्र सोनार से विजय यादव की बातचीत होने की जानकारी भी सामने आई।
बाद में विजय यादव का शव मनियर थाना क्षेत्र में घोंघा पुल के नीचे मिलने की बात सामने आई। मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना पूरी की और न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
15 साल बाद अदालत ने सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अशोक कुमार ओझा एवं पंकज कुमार सिंह अधिवक्ता ने पैरवी करते हुए गवाहों को न्यायालय के समक्ष परीक्षित कराया। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से सुभाष चंद्र श्रीवास्तव ने अपना पक्ष रखा।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का सम्यक अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने राजेन्द्र सोनार और अमित उर्फ मंटू को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास एवं जुर्माने की सजा सुनाई। मामले में करीब 15 साल 7 माह 6 दिन बाद फैसला आया।