बलिया /भारत के राष्ट्रपतीय राजपत्र संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश संशोधन अधिनियम-2002 द्वारा गोंड जाति को अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता दी गयी है! प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश शासन समाज कल्याण अनुभाग-3 लखनऊ शासनादेश संख्या- 129/2021/3206/26-3-2021 दिनांक 3 नवम्बर 2021 द्वारा स्पष्ट रूप से दिशा-निर्देश दिया गया है कि आवेदनकर्ता द्वारा साक्ष्य के तौर पर भू-राजस्व अभिलेखों 1323, 1324, 1356, 1359 किसी एक फसली में गोंड अंकित हो की पुष्टि अभिलेखागार के मूल रिकॉर्ड से किए जाने के पश्चात गोंड अनुसूचित जनजाति का प्रमाण-पत्र निर्गत कर दिया जाए! इसमें किसी भी प्रकार की हिला- हवाली न की जाए!”
उक्त दिशा-निर्देश का कड़ाई से अनुपालन कराने की मांग को लेकर 11 मई 2026 को ऑल गोंडवाना स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आगसा) के जिला संयोजक बिट्टू प्रसाद गोंड के नेतृत्व में जिलाधिकारी कार्यलय पर प्रदर्शन कर मुख्य मंत्री व राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा गया! इस दौरान ऑल गोंडवाना स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आगसा) के जिला संयोजक बिट्टू प्रसाद गोंड ने कहा कि आदिवासी जनजाति गोंड समुदाय के लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए हम निरंतर लगातार संघर्षरत हैं! अब आंदोलन के अगले क्रम में आदिवासी गोंडऊ नाच गोंडऊ बाजा हुरुका के साथ लखनऊ विधानसभा पर विराट प्रदर्शन किया जाएगा! आगसा जिला संयोजक बिट्टू प्रसाद गोंड के अलावा अरविन्द गोंडवाना, सुरेश शाह, संजय गोंड, उमाशंकर गोंड, प्रिन्स गोंड, रवीन्द्र गोंड, सोनू गोंड, सुदेश कुमार मंडावी, बच्चालाल गोंड, ओमप्रकाश गोंड, अवधेश गोंड, कौशल कुमार, मनोज गोंड, शिवशंकर गोंड, भुनेश्वर गोंड, चन्दन कुमार प्रमुख रूप से मौजूद रहे!