कम खर्च, कम समय और त्वरित न्याय! बलिया में एडीआर तंत्र और लोक अदालत को लेकर लोगों को किया गया जागरूक।

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बलिया /उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश तथा जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बलिया के अध्यक्ष अनिल कुमार झा के आदेशानुसार मंगलवार को दीवानी न्यायालय परिसर स्थित एडीआर भवन में मध्यस्थता एवं लोक अदालत के विशेष संदर्भ में एडीआर (वैकल्पिक विवाद समाधान) तंत्र पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बलिया के पूर्णकालिक सचिव चन्द्र प्रकाश तिवारी ने एडीआर तंत्र की उपयोगिता और महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वैकल्पिक विवाद समाधान केन्द्र न्यायालय के बाहर विवादों को आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में सुलझाने का प्रभावी माध्यम है। इसके जरिए मामलों का शीघ्र, सस्ता और सरल निस्तारण संभव होता है।

उन्होंने कहा कि एडीआर प्रणाली का मुख्य उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करना तथा आम नागरिकों को त्वरित और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है। मध्यस्थता प्रक्रिया में एक निष्पक्ष व्यक्ति, जिसे मध्यस्थ कहा जाता है, विवादित पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर उन्हें आपसी सहमति से समाधान तक पहुंचाने में मदद करता है। मध्यस्थ किसी प्रकार का फैसला नहीं सुनाता, बल्कि पक्षकारों को समाधान खोजने में सहयोग प्रदान करता है।

शिविर में लोक अदालत की विशेषताओं पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि लोक अदालत एक वैधानिक मंच है, जहां विवादों का निपटारा समझौते और सहमति के आधार पर किया जाता है। इसका उद्देश्य आम जनता को सस्ता, सरल एवं त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है।

कार्यक्रम में विधि के छात्र-छात्राओं सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने एडीआर तंत्र, मध्यस्थता एवं लोक अदालत की प्रक्रियाओं तथा उनके लाभों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित यह जागरूकता कार्यक्रम लोगों को वैकल्पिक विवाद समाधान के प्रति जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

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